खुद को समझायें बतायें क्या?..
भागाभागी में जीवन के कैसे दुर्योग हैं कि जिस दुनिया में आपका मन रमता है अब उसकी तक ज़रूरी नहीं खुद को ठीक-ठीक ख़बर रहे (वैसे मैं तो भागता भी कहां हूं? जो और जितना भागना है खुद से ही भागना है!). सिनेमा की रखता हूं फिर पता चलता है शायद नहीं रख सका हूं....
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Pramod Singh
विश्व सिनेमा
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[09 Jul 2009 12:12 PM]



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