कभी सुना हैं इंटरनेटीय संगीत ?

वीणापाणी सभी संगीतकार मानते हैं संगीत ईश्वर की तरह यत्र तत्र सर्वत्र हैं,झरने की झर झर में ,चिडियों की ची ची में,हवा की गति में ,बारिश की रिमझिम में,सृष्टि के कण कण में संगीत का वास हैं,संगीत उत्त्पत्ति काल से लेकर ,मंदिरों से निकल कर,दरबारों से निकल कर ,सर्व... [पूरी पोस्ट]
writer राधिका उमडे़कर बुधकर
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[09 Jul 2009 01:23 AM]

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