सरकार की तरह नहीं
गुरुजी हमारी जेब में पाँच रुपये हों, तो हम सात रुपये के समोसे नहीं ले सकते, पर सरकार घाटा उठाकर खर्च कैसे कर लेती है। बेटा सरकार को सात क्या सात अरब के समोसे खरीदना भी शोभा देता है। गैरजिम्मेदारी, आय से ज्यादा खर्च और लफ्फाजी सरकार को ही शोभा देती है...
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alok
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[08 Jul 2009 18:54 PM]



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