एक छोटे शहर की लड़की (१)

feminist poems एक छोटे शहर की लड़की आँखों में हज़ारों सपने लिए आती है महानगर में, अकेली लड़ती है अपने अस्तित्व को मिटने से बचाने के लिए, एक पहचान हो उसकी भी बस इतना चाहती है, और इसके लिए रोज़ एक नया गुर सीखती जाती है।... [पूरी पोस्ट]
writer mukti

पहचान

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[08 Jul 2009 16:16 PM]

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