“निकाल इसी बात पै सौ का नोट”

हँसते रहो राजीव तनेजा*** “रुक…अबे रुक"…. "ज्जी…मैँ?"…. "ओर तेरा फूफ्फा?".… "जी…बोलिए"… "बेट्टे!….बोलूँगा तो मैँ जरूर और सुणेगा बी तू जरूर"अपनी मूँछों को ताव दे बैरियर पे खड़ा सिपाही ब... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव् तनेजा
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[08 Jul 2009 15:03 PM]

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