पहचान के संघर्ष से आत्मनिर्भरता की ओर
सामाजिक तौर पर बहिष्कृत, अनवरत् मानसिक यंत्रणा का दंश झेल रही और गलियों में भीख मांगकर दो वक्त की रोटी जुटाने वाली वृंदावन की विधवा महिलाओं को कई बार शारीरिक शोषण का भी शिकार होना पड़ता है, इस सामाजिक निष्ठुरता एवं सरकारी उपेक्षा के बीच इन महिलाओं को...
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उमाशंकर मिश्र
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[08 Jul 2009 05:15 AM]



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