कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात
बेशर्मी का जमाना है" आजकल बेशर्मी का जमाना है, गाली दे कर ताली बजाना है । वो किस हद तक गिर सकते हैं, हमें भी ये बात आजमाना है । किसी की मेहरबानी दरकार नहीं, इनायत-ए-खुदा का ख़जाना है । जाने-अनजाने रिश्ता है उनसे, उसी का तो भरना जुर्माना है । पूजा-पाठ,...
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[08 Jul 2009 02:44 AM]



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