* राह में हो अँधेरा तो...! * (~जयंत)
कई घटनाएँ देखकर (और कुछ का भुक्तभोगी बनकर) मन थोड़ा सा विचलित हो गया था... विगत कई दिवसों से समय का घोर अभाव चल रहा था... और उससे बड़ी बात थी; मन लग नहीं पा रहा था .. कविता, साहित्य आदि में... बहुत सी व्याधियां हैं और चुनौतियां हैं अभी जीवन में.... संघ...
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Jayant Chaudhary
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[08 Jul 2009 00:23 AM]



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