बारिशाना मौसम में शून्य दिमाग !
झम-झम-झम-झम मेघ बरसते हैं सावन के छम-छम-छम गिरती बूँदें तरुओं से छन के चम-चम बिजली चमक रही रे उर में घन के धम-धम दिन के तम में सपने जगते मन के ऐसे पागल बादल बरसें नहीं धरा पर जल फुहार बौछारें धारें गिरती झर-झर उड़ते सोन-बलाक आर्द्र सुख से कर क्रंदन घ...
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अभिषेक ओझा
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[07 Jul 2009 19:12 PM]



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