हाय, नो टेंशन
अभी गरमी में जाती बिजली को रो रहे थे कि अब बरसात में उफनती नालियों पर रोने का सीजन आ लिया है। सर्दियों में कोहरे की दुर्घटनाओं पर रोते थे। आवहु सब मिल बैठें रोवहु भाई, सतत रोवहु भाई। बिजी रहता हूं एक मसले पर रोने में, तो दूसरे कई टेंशन याद नहीं रहते।...
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alok
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[07 Jul 2009 19:08 PM]



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