तूने मोह लिया इलाहाबाद - 8

और जाओ... जला कर राख कर दो वैशाली को इस आग में.... आनंदभवन से छूटते ही हमने रिक्शा ली, और चल पड़े संगम की तरफ...उस संगम की तरफ जिसके बारे में बचपन से सुनता आ रहा था। जिस संगम का नाम सुनते ही मेरी दादी की आंखों में चमक आ जाती थी, जिस संगम के बारे में मां ने आते वक्त फोन पर खासतौर पर डुबकी मार लेने को... [पूरी पोस्ट]
writer sushant jha
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[07 Jul 2009 13:10 PM]

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