फिर नए शेर ......

kavideepakgupta बनाकर अपनी दुनिया को उसे बर्दाश्त भी करना खुदा मेरे मैं तेरे हौसले की दाद देता हूँ परिंदे ने कहा तू कैद रख या कर रिहा मुझको मैं अपनी ज़िन्दगी का हक़ तुझे, सैय्याद देता हूँ मैं दुःख से घिर गया तो गैब से आवाज ये आयी सुखों की छावं मैं अक्सर दुखों के बाद... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
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[07 Jul 2009 12:02 PM]

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