तुमने कहा न तुमको छेड़ा

गीतकार की कलम तुमने कहा न तुमको छेड़ा कभी किसी ने ओ कुरूपिणे इसीलिये छेड़ा है मैने तुमको सीटी एक बजाकर हमदर्दी के कारण केवल कदम उठाया है ये सुन लो अब ऐसा मत करना मेरे गले कहीं पड़ जाओ आकर नहीं छेड़ती सुतली जैसी ज़ुल्फ़ तुम्हारी कभी हवा भी बेचारी कोशिश करती है, लेकिन जुट... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश खंडेलवाल
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[07 Jul 2009 09:22 AM]

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