एक अनुरोध .....

मा पलायनम ! यह सितारों भरी रात फ़िर हो न हो आज है जो वही बात फ़िर हो न हो एक पल और ठहरो तुम्हे देख लूँ कौन जाने मुलाकात फ़िर हो न हो । हो गया जो अकस्मात फ़िर हो न हो हाथ में फूल सा हाथ फ़िर हो न हो तुम रुको इन क्षणों की खुशी चूम लूँ क्या पता इस तरह साथ फ़िर हो न हो ।... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. मनोज मिश्र
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[07 Jul 2009 08:15 AM]

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