अब आपको बजट वाले दिन हिन्दी के धुरन्द्र चिट्ठा-लिखाकारो के पास लिए चलता हु।
अर्थपूर्ण-अर्थहीन हमारे देश मे बजट ने कुछ कुछ उत्सव का स्वरुप ले लिया है। लोग कयास लगाने लगते है। वे भले अर्थशास्त्र की बारीकियो मे न जाए पर वे इस विमर्श मे जरुर जुट जाते है कि बजट उनके रोजमरा के जीवन पर क्या असर डालेगा, उन्हे कितना...
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MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर
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[07 Jul 2009 07:40 AM]



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