फरीद के श्लोक - ३८

*साधना* फरीद दरवेसी गाखड़ी,चोपड़ी परीति॥इकनि किनै चालीऐ,दरवेसावी रीति॥११८॥तनु तुधै तनूर जिउ,बालण हड बलंनि॥पैरी थकां,सिरि जुलां,जे मूं पिरी मिलंनि॥११९॥तनु न तपाऐ तनूर जिउ, बालणु हड न थालि॥सिरि पैरी किआ फेड़िआ,अंदरि पिरी निहालि॥१२०॥फरीद जी कहते हैं कि फकीरी का रा... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत बाली

परमजीत बाली

views
27
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
8
[07 Jul 2009 03:59 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix