चाणक्य नीति-पराया धन मिट्टी समझें (chankya niti)
यो मोहन्मन्यते मूढो रक्तेयं मयि कामिनी। स तस्य वशगो मूढो भूत्वा नृत्येत् क्रीडा-शकुन्तवत्।। हिंदी में भावार्थ- नीति विशारद चाणक्य के अनुसार कुछ पुरुषों में विवेक नहीं होता और वह सुंदर स्त्री से व्यवहार करते हुए यह भ्रम पाल लेते हैं कि वह वह उस पर मोह...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
dharm
43
1
0
1
1
[06 Jul 2009 21:42 PM]



Shuffle







