संत कबीर वाणी-मांस का भक्षण मनुष्य के लिये नहीं (Kabir ke dohe)

शब्दलेख सारथी यह कूकर को भक्ष है, मनुष देह क्यों खाय। मुख में आमिष मेलहिं, नरक पड़े सो जाये।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि मांस तो श्वान का भोजन है फिर मनुष्य की देह पाकर उसे क्यों खाये। यह जानते हुए भी जो मांस खायेगा वह नरक में जायेगा। मांस मछलियां खात है, स... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

dharmआत्म-विकास

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[06 Jul 2009 21:40 PM]

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