प्रणव बाबू...कुछ बचा सो मंहगाई मार गई।
जब से होश संभाला है, बजट को बहुत गौर से देखता हूं। बचपन में पिता जी बजट देख कर प्लान बनाते कि फलां चीज सस्ती हो गई है, अब ख़रीदा जा सकता है। मां को हिदायत देते, तेल मंहगी हो गई है, थोड़ा संभल कर खर्च करो। शाम में यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसरों का घर पर म...
[पूरी पोस्ट]
Rajiv K Mishra : Roam-antic Realist
76
7
0
7
2
[06 Jul 2009 19:55 PM]



Shuffle








