हाहा ही ही.. बजट्ट अली बजट्ट अली, हो बजट्ट अली

युं ही, निट्ठल्ला... सोचा कुछ - हुआ कुछ और ही है निट्ठल्लों सँग ही ऎसा होता क्यूँ है सोचा कि कम्पू बेबी को हाथ न लगाऊँगा अपने सड़े विचारों का अचार पक न जाये जब तक शब्दों की खटास में तनिक मिठास न आये तब तक बेटी को फोन लगाया, उछल पड़ी " पापा सच्चीऽऽ ? बेटे को मेसेज़ किया... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
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[06 Jul 2009 18:48 PM]

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