पहचान
इस भीड़ में चेहरे हैं बहुत पर कोई पहचाना चेहरा नहीं मिलता. चेहरों के पीछे चेहरें हैं और उसके भी पीछे चेहरे अपनों के बीच भी कोई अपना नहीं मिलता. क्यूँ अपनी पहचान को छिपाते हैं यहाँ लोग जो जहाँ जैसा है क्यूँ वैसा नहीं मिलता....
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mukti
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[06 Jul 2009 15:06 PM]



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