दिन बचपन के

गुल्लक बचपन के दिन कुछ इस तरह याद आएं कहीं से टूटे खिलौने जैसे बच्‍चे ढूंढ लाएं रेल के खेल की कूकू, खेलना पहाड़-पानी कभी गिल्‍ली-डंडा, कभी बेबात शर्त लगाएं खेल वो आती-पाती, मिट्टी का घर-घूला बरसती धूप में ,जब तब अंटियां चटकाएं दादी की कहानी, सरासर गप्‍प नान... [पूरी पोस्ट]
writer राजेश उत्‍साही
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[06 Jul 2009 13:32 PM]

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