अब प्रणब दादा की बारी

उज्जास उमाशंकर मिश्रममता दीदी के रेल बजट के बाद अब प्रणब दादा की बारी थी। मंदी के दौर और खेती के चौपट होने की मार झेल रही ग्रामीण जनता को नई सरकार से काफी उम्मीदें थी। कृषि क्षेत्र के लिए कम से कम चार प्रतिशत की विकास दर का लक्ष्य रखते हुए अर्थव्यवस्था के ल... [पूरी पोस्ट]
writer उमाशंकर मिश्र

बजट

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[06 Jul 2009 07:27 AM]

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