समलैंगिकता के दायरे में नहीं आते सभ्यता-संस्कृति के बंधन
समलैंगिकता पर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। बहस विवाद का रूप लेती जा रही है। बहस और विवाद की सार्थकता तभी है, जब उसका कोई ठोस परिणाम हमें देखने व जानने को मिले। समलैंगिकता के मामले में ऐसा होना इसलिए मुश्किल है, क्योंकि यथास्थितिवादी जमातें भारतीय संस्कृ...
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अंशुमाली रस्तोगी
बहस
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[06 Jul 2009 06:14 AM]



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