आप की तारीफ़ में
सब कुछ थोथा लागे रे मुझे तो प्रेम के आगे चाँद-सूरज फीके लागें मुझे तो स्नेह के आगे.............. चेहरा उसका ऐसे चमके जैसे सूरज दमके । चाँद को भी शर्म आए जो वो मुस्कुरा दे ॥ रोके से नहीं रूकता है मन मेरा, तू सुन ले । बार - बार इसको घेरे तेरे आकर्षण के...
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Mahendra
गीत
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[06 Jul 2009 05:46 AM]



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