बहुत मनुहार के बाद भी...

कच्‍चा चिट्ठा कहानी रुकी नहीं हम अनदेखा करते गये, होनी थी कि टली नहीं मोड़ ले कर आगे बढ़ गई, कहानी रुकी नहीं विकट पगडंडियाँ थी और घूप थी तेज हम प्यासे रह गये पनिहारिन थी कि रुकी नहीं बहती रही पुरवाई, और भीगती गई पलकें साश्रु नयनों से पर एक भी आँसू टपका नहीं हवाओं... [पूरी पोस्ट]
writer मथुरा कलौनी
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[06 Jul 2009 03:57 AM]

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