जब वो मिले

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... मैनें पूछा कैसे हो, बदले हो या वैसे हो, कहते हो अब भी दोस्त हमे, या इक अन्जान मुसाफिर जैसे हो, रुप वही, आवाज़ वही, मेरी बातों का तो अन्दाज़ वही, वैसा ही हूँ जैसे छोड़ा था, और तुमसे मिलने को दिल बेताब वही, पर तुम मे कुछ तो अलग सा है, तुम्हारी आँखो मे वो... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[06 Jul 2009 00:51 AM]

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