मैं भी गे हुआ, तू भी गे हुआ !
आज से मैं गे हुआ. ये घोषणा दिल्ली हाईकोर्ट के क्रांतिकारी फ़ैसले के बाद की है. क्योंकि अगर तू गे है तो प्रोग्रेसिव है. अन्यथा नहीं. अगर तू गे है तो सैंसिटिव है. अन्यथा नहीं. अगर तू गे है तो तेरा जनतंत्र पर यक़ीन है, वगर्ना तू फ़ासीवादी है. मै न इंसैं...
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Rajesh Joshi
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[05 Jul 2009 18:59 PM]



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