चूल्हा
हिन्दी में पीढा, चौकी, कुदाल जैसी अतीत हो चुकी चीजों पर लिखी अतीतग्रस्त कविताओं की लम्बी शृंखला है। चूल्हा भी ऐसा ही पवित्र प्रतीक है ... पर मै जब इसे देखता हूँ तो यह अलग ही दीखता है) चूल्हे की याद करता हूँ तो याद आती है ताखे पर टिमटिमाती ढिबरी जलते...
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अशोक कुमार पाण्डेय
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[05 Jul 2009 13:12 PM]



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