तुम मेरे दर्द को फूलों का घर देना
हम तेरे जीवन की राह को संवार देंगे तुम मेरे दर्द को फूलों का घर देना नयनों में प्यार का सागर उतार कर साँसों को चंदन सी खुशबू का हार दो उड़ते समय के पंछी से पूछ लो कब तक मनाओगे फागुन के फाग को हम तेरी प्रीति को नए प्रतिमान देंगे पहले मेरे आँचल को वासं...
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Deepa Pant
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[05 Jul 2009 12:30 PM]



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