डबरे पर सूरज का बिम्ब

मुक्तिबोध जब उससे मैं सड़क पर मिला, मुझे लगा कि वह ठीक बात करने के मूड में नहीं है। राह में मुझे देखकर वह खुश नहीं हुआ था। उसकी शर्ट की पीठ पसीने से तर-बतर थी, बाल अस्त-व्यस्त थे। और चेहरा ऐसा मलिन और क्लान्त था मानो सौ जूते खाकर सवारी आ रही हो। तत्काल निर्णय ल... [पूरी पोस्ट]
writer रंगनाथ सिंह
views
14
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[05 Jul 2009 11:16 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix