फुरसत के लम्‍हे

मोहन का मन नमस्‍कार साथियों माफ करना आजकल थोडी दिक्‍कतें आ रही हैं इसलिए ज्‍यादा समय नहीं बिता पा रहा हूं आप सभी के साथ। आज आप को थोडा मुस्‍कुराता देखने को दिल कर रहा है इसलिए आप सभी के साथ एक हास्‍य कविता सांझा कर रहा हूं जिसे लिखा है हमारे विजय जैन जी ने तो प... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन वशिष्‍ठ

हास्य कविता

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[05 Jul 2009 10:15 AM]

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