ढोल,गँवार ,सूद्र ,पसु ,नारी... की चौपाई अप्रवासी की दृष्टि से

अप्रवासी उवाच (Apravasi Uvach) अभी कुछ दिनों पूर्व ' बालसुब्रमण्यम जी' के चिठ्ठे को पढ़ रहा था। उन्होंने तुलसीदास के हिन्दी भक्तिकाल को योगदान के विषय में लिखा हैं। तुलसीदास मेरे भी प्रिय रचनाकारों में से हैं। तुलसी राम चरित मानस के साथ ही हम बड़े हुयें हैं। मुझे अपने दादाजी याद आत... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)
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[05 Jul 2009 01:15 AM]

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