संडे यूं ही-सिर्फ इत्ता ही

आलोक पुराणिक की अगड़म बगड़म वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है चालीस से ज्यादा साल निकाल दिये इस जिंदगी के। कितने क्षण ऐसे हैं, जब ऐसा लगा हो कि यह क्षण ऐसा है, जब लगा हो कि अब मामला खल्लास भी हो ले, तो प्राबलम नहीं। बहुत कम-बहुत पहले जब पत्नी मास्टर आफ लाइब्रेरी साइंस का कोर्स... [पूरी पोस्ट]
writer alok

हास्य-व्यंग्यsunday

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[04 Jul 2009 18:50 PM]

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