जो जी चाहे
जो जी चाहे वो घड़ियाँ याद कर लेना जो साथ गुजरीं थीं वो कड़ियाँ आबाद कर लेना १ नहीं मालूम हमको है , कहाँ जाती हैं ये राहें हमें मालूम इतना है , बड़ी प्यासी हैं ये रूहें बड़ी प्यासी हैं ये रूहें २ कहाँ मिट्टी के माधो तुम , कहाँ हूँ मैं भी ठहरी सी टकरा के...
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शारदा अरोरा
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[04 Jul 2009 03:11 AM]



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