समलैंगिकता, सविता भाभी, भूजल दोहन और हिंदी
आज पहली बार हमारे गांव के मैनेजर बाबू को यह दुनिया अच्छे लोगों और अच्छाइयों से भरी-पूरी लग रही है। जिन पढ़े-लिखे शहरी लोगों को वे जेठ की दुपहरी में पानी पी-पीकर कोसा करते थे, आज उनके प्रति उनका प्यार उमड़ पड़ा है। मैनेजर बाबू अपने समय के रईस तो थे...
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अशोक पाण्डेय
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[03 Jul 2009 20:38 PM]



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