सावन की वो घड़ियाँ....
लगी जब - जब सावन की फुहारों की लड़ियाँ याद आने लगी हमारे मिलन की वो घड़ियाँ सोचा नहीं था मिलेंगे हम इक दिन देखा जब मैंने तुम्हारी आंखों में उस दिन वो भीगा सा आँचल वो भीगी फिजाएं वो सड़कों पे ढूंढ़ना दरख्तों के साए वो चंचल शोख हवाओं का बहना वो हाथों को...
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अर्चना तिवारी
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[03 Jul 2009 07:23 AM]



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