उन लफ्ज़ों को चूने दो.....

swati : रेगिस्तान में पड़ रही है बर्फ अधरों पर तुम्हारे जो तरसती रही सदा हर वो बात ....... जिसे नैनों ने तुम्हारे संजो रखा था ख़ुद में आज फिर ,चिर प्रत्याशा में हूक रहा है जी ........ उसी इक अनहुए स्पर्श के लिए कि इक बार अधरों से उन लफ्ज़ों को चूने दो........... [पूरी पोस्ट]
writer swati
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[03 Jul 2009 02:51 AM]

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