क्षितिज
क्षितिज अपूर्व तुम्हारा मिलन है तुम भरमाते आह्लादित करते और मन को एक सहारा देते कि मिलते हैं पृथ्वी और आकाश। तुम्हारा मिलन एक असत्य सत्य है, तुम्हें न दिन लिहाज न रात का डर है अपूर्व तुम्हारा मिलन है।...
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उषा वर्मा
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[02 Jul 2009 18:00 PM]



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