ये तो कोई ज़ियाँ नहीं
तेरे बगैर लगती है, अच्छी मुझे फ़िज़ाँ नहीं सरसर लगे सबा मुझे, गर पास तू ए जाँ नहीं (सरसर - रेगिस्तान की गर्म हवा) (सबा - ठंडी हवा) मैं जल रही थी, मिट रही थी, इंतिहां थी प्यार की अंजान वो रहा मगर, क्यूंकी उठा धुआँ नहीं कल रात पास बैठे जो, हम राज़दार ह...
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श्रद्धा जैन
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[02 Jul 2009 10:32 AM]



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