बूंदों की रुन-झुन
बूंदों की रुन-झुन औ गीले स्पर्श की गीली सी धुन .... सुमन का यौवन कि पंखुडी का कटाव इस द्वैत का समस्त भाव संपूर्ण रूप का ये इक छल हर उर बांधे....हर पल-पल..........
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swati
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[02 Jul 2009 08:46 AM]



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