एक कबूतर दब गया था ----
तुमने कहा -- रूको, मत जाओ मैनें समझा -- रूको मत, जाओ और मैं चुपचाप चला आया था -- उस दिन बिना किसी शोर बिना किसी तूफान कितना भयानक ज़लज़ला आया था -- उस दिन काश ! तुमने देखा होता चट्टान का खिसकना काश ! तुमने भी देखा होता वह मंजर जब एक मकान ढहा था अधबना औ...
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M VERMA
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[02 Jul 2009 08:17 AM]



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