कोतुहल
ख़बर रखते रहे ज़माने की,और ये याद ना रहा, कब आखिरी बार मिले थे तुझे। गुज़रे गए अनजाने में,हम उन गलियों से, जहाँ आखिरी बार मिले थे तुझे।...
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nadeem
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[02 Jul 2009 05:24 AM]



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