पुनर्वालोकन
गीत - अस्थियों के जंगल में" अस्थियों के जंगल में, भटकी हैं, संवेदना की तितलियां ! यंत्र - चालित से ह्रदय हैं, पानी से भरी धमनियां !! भावना है व्यर्थ यहां, सब का अर्थ है, अर्थ यहां, बस माया ही अर्धय यहां, सब दे के मिले दर्द यहां, स्वार्थ की ये नगरी है...
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[02 Jul 2009 01:49 AM]



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