मिलन

मेरे बोलों को तुम अपनी रवानी दे दो !!! मेरे ज़ेहन में उठनेवाले सारे सवालों में मिलना । रात- दिन तुम मुझको मेरे ख़यालों में मिलना ॥ मैं हवा हूँ, कर न पाऊँ 'ग़र मुलाक़ात हर रोज़ पलकों के अँधेरे में मिलना, धड़कन के उजालों में मिलना । हर पल पसंद है तेरा रुप- श्रृंगार मुझको बंद ज़ुल्फ़ों में मिलो... [पूरी पोस्ट]
writer Anurag Srivastava
views
18
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[02 Jul 2009 01:37 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix