जब बारिश भीग रही थी..........

MERA SAGAR सुबह हुई तो देखा, बारिश भीग रही थी, हम भी भीग रहे थे, तन्हाई भीग रही थी। जब-जब देखूं उसको, वो शरमा-शरमा जाती, लाली सी हो जाती, बिजली चमका जाती। मन देख-देख यूं उसको, मयूरा डोल रहा था, हरी-हरी धरा पर, हर पत्थर बोल रहा था। सूरज की आंखे कैसे, धुंधला-धुंध... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL
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[02 Jul 2009 01:21 AM]

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