तुम और ये बारिश
घिर आया सावन, शायद आज तू मुस्कुराई है, लम्बी खामोशी की तेज़ धूप के बाद, बारिश मेहमान बन के आई है, हवा का एक झोंका चला, शायद तेरे सकुचाने से, फिर अचानक धीमी हो गई बरसात, शायद किसी बात पे तू शर्माई है, मिट्टी से सौंधी सी खुशबू आई, पेड़ों पर सब पत्ते धुल...
[पूरी पोस्ट]
Gurnam Singh Sodhi
14
1
0
1
5
[02 Jul 2009 00:50 AM]



Shuffle








