तुम और ये बारिश

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... घिर आया सावन, शायद आज तू मुस्कुराई है, लम्बी खामोशी की तेज़ धूप के बाद, बारिश मेहमान बन के आई है, हवा का एक झोंका चला, शायद तेरे सकुचाने से, फिर अचानक धीमी हो गई बरसात, शायद किसी बात पे तू शर्माई है, मिट्टी से सौंधी सी खुशबू आई, पेड़ों पर सब पत्ते धुल... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[02 Jul 2009 00:50 AM]

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