मेरा देश है महान
इधर बीच कुछ व्यस्तता है। तब तक के लिये कुछ हल्का-फ़ुल्का पेश है- नहीं कोकिला के बैन नहीं हिरणी के नैन जो चुराये चित्त-चैन वो तुम्हारी है मुस्कान कठिन महाकाल से पीड़ाओं के भूचाल से बचाए हर जाल से बस एक भगवान देखो दुनिया है गोल रखो सबका ही मोल बोलो मीठे-...
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रविकांत पाण्डेय
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[01 Jul 2009 16:41 PM]



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