तुम्हें मैं याद आती हुँ?

तेरे नाम........यही तो है। जानवर*~*~*~* अजब पागल सी लड़की है, मुझे हर खत में लिखती है “मुझे तुम याद करते हो? तुम्हें मैं याद आती हूँ?" मेरी बातें सताती है, मेरी नींदें जगाती है, मेरी आँखे रुलाती है, दिसम्बर की सुनहरी धूप में अब भी टहलते हो? किसी खामोश रास्ते से कोई आवाज आती है?... [पूरी पोस्ट]
writer गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी
views
27
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
3
[01 Jul 2009 08:31 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix