आई मां मैं सच, हाँ सच
कुढ़ मत सपने अब मत जल आई मां मैं सच, हाँ सच बादल की सफ़ेद गाड़ी में पंख फैलाये हवा से बातें गप-शप नींद पुराने क़िस्से आती हूँ मां सच, हाँ सच आम के पेड़ों से कहना, दो आम रख लें बचा के अपने बारिश से कहना कि मुनिया आती हैं अब के हाँ सच साजन पीछे तुम रो लेना...
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मानसी
poetry
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[01 Jul 2009 08:21 AM]



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